Monday, 3 September 2018

अपनी सदा

अपनी सदा तुझको सुनाऊँ
सुन ले जरा अब आ भी जा
अपनी वफ़ा कैसे दिखाऊं
तू है कहा अब आ भी जा

कैसे कहूं मैं हाँ क्या कहूं मैं
तन्हा तेरे बिन कैसे रहूँ मैं
तू यूँ ख़फ़ा है तू यूँ जुदा है
लगता है रूठा मेरा ख़ुदा है
जानूं ना तुझको कैसे  मनाऊं
तू मान जा बस मान जा !

तेरी कमी को आँखों की नमी को
ले कर गुजारूं कैसे इस ज़िन्दगी को
मैं जी रहा हूँ जैसे मर रहा हूँ
तू लौट आये बस ये दुआ कर रहा हूँ
यूँ हीं तड़प के मैं मर ना जाऊं
एक बार आ फिर तू ना जा
अपनी सदा तुझको सुनाऊँ
सुन ले जरा अब आ भी जा !!

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